15.7.11

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13.7.11

नंदनी को जब अरमान ने किसी दूसरे लड़के  के साथ बाईक पर घूमते देखा तो उसका मन निराशा से भर गया। उन्हें वह दौर याद आ गया जब नंदनी उनके साथ हाथों में हाथ डालकर घूमा करती थी। कभी जीवन भर एक दूसरे का साथ निभाने की कशमें खाई थी। पर दोनो अलग हुए क्यों? क्या इसके लिए अरमान का व्यवहार जिम्मेदार था? हो सकता है। नंदनी आधुनिक ख्यालों में रची बसी थी। पर अरमान परम्परागत विचारों को आदर्श मानता था। उन्हें  न तो नंदनी का पहनावा पसंद था और न  ही वह नंदनी के उन विचारों को प्रशय देता था जो नंदनी...

12.7.11

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11.7.11

पाश्चात्य संस्कृति को हम क्यूं  इतना स्वीकर करें   छोड़ के अपना घर आंगन गैरों के घर से प्यार करें आठ इंच की  हील कहीं, कहीं कमर से नीचे पैंट है खान-पान में पिट्जा बर्गर फिल्मों में जेम्स बांड है हिंदी भी अब रोने लगी है देख के आज युवाओं को बात-चीत की शैली में जो अमरिकन एक्सेंट है  जरूरी है क्या इन चीजों को खुद से अंगीकार करें पाश्चात्य संस्कृति को हम क्यूं इतना स्वीकार करें हेड फोन कानों में लगा है जुबां पे इसके गाली है बाल हैं लंबे, हेयर बेल्ट और कान में इसके बाली...

9.7.11

अज्ञात नामक  एक गांव था। इस गांव के विषय में असामान्य यह था कि यहां सभी अनपढ़ लोग रहते थे। सिर्फ चतुर्वेदी जी को छोड़ कर। ऐसा नहीं था कि चतुर्वेदी जी बहुत बड़े विद्वान थे। चूंकि वह गांव के बाकी लोगों से ज्यादा पढ़े लिखे थे, यहां वहां भ्रमण करते रहते थे, इसलिए लोगों की नजर में किसी विद्वान से कम नहीं थे। चतुर्वेदी जी की एक अच्छी आदत थी। जब भी वह कहीं कोई नई चीज देखते, उसे अपनी डायरी में नोट में...

3.7.11

सेफिया मुझे माही कह कर पुकारती थी। दरअसल यह नाम मेरी मां का दिया हुआ था। कभी-कभी मुझे भी बड़ा अजीब लगता था। कैसा लड़कियों वाला नाम है यह? और एक बार वैभव ने तो कह भी दिया था कि पंजाबी लड़कियों में माही नाम बेहद प्रचलित है। पर सेफिया को माही नाम बेहद पसंद था। वह हमेशा मुझे इसी नाम से संबोधित करती थी। बाकी दोस्त मेरे माही नाम पर चुटकियां लेने लगते थे, पर सेफिया के संबोधन में आत्मीयता का भाव होता था। वह सम्मानपूर्वक, अधिकारपूर्वक और बेहद गर्व के साथ मुझे इस नाम से संबोधित करती थी। अकेले में तो ठीक था...

30.6.11

दिल में हो कुछ और मगर चेहरे से कुछ और दिखाने काहुनर हमने भी सीख लिया है फर्जी रिश्ता बनाने का अनजान था अपनी सूरत से मैं दर्पण नैन के उसने दिखलाई एहसास-ए-मोहब्बत से था खाली प्रेम फूल के उसने खिलाई इरादे उसकी समझ न पाया जो था मुझको मिटाने का हुनर हमने भी सीख लिया है फर्जी रिश्ता बनाने का चारों तरफ था अंधियारा वो आशा की एक किरण थी रौशनी ने दस्तक दी थी वो सूरज की एक किरण थी रौशनी का खेल असल में खेल...

18.6.11

एक चैंपियन टीम कौन होती है? पूर्व आस्ट्रेलियाई कप्तान एलन बोर्डर ने एक बार कहा था कि चैंपियन टीम वह होती है जो जीत के  हालात न होने के  बाद भी जीत के  आसार पैदा कर दे। भारतीय टीम सीरीज भले ही जीत गई हो पर प्रभावित करने में नाकाम रही। पांच मैचों में अंतिम दो हार ने जीत की खुशी फीकी कर दी। कहां तो शुरूआती जीत से भारत की वाहवाही हो रही थी, पर आखरी दो मैचों में तो भारत मुकाबले में था ही नहीं। शुरूआती जीत को भी धमाकेदार नहीं कहा जा सकता। यह सच है कि भारत के प्रमुख खिलाड़ी इस श्रृंखला में...

19.5.11

फोटो गूगल से साभार कैसी तुझसे लगी है दिल की लगन, एक तुम्हारे सिवा कुछ भी दिखता नहीं.  कितने फूलों ने भँवरे को निमंत्रण दिया, एक तुम्हारे सिवा कोई जंचता नहीं.खुशबूओं से रचा है बदन ये तेरा, तू रहती है फूलों की हर डाल में .मुस्कुरा के  पलटकर जो देखोगी तुम, कैसे दिल चुप रहेगा इस हाल में. तुम संभालोगे फिर भी न संभलेगा दिल, जोर इसपर किसी का भी चलता नहीं.कैसी तुझसे लगी है दिल की लगन,...

16.5.11

तेरी तस्वीर भी मुझसे रू-ब-रू नहीं होतीभले मैं रो भी देता हूँ गुफ्तगू नहीं होतीतुझे मैं क्या बताऊँ जिंदगी में क्या नहीं होता ईद पर भी सवईयों में तेरी खुशबू नहीं होती जिसे देखूं , जिसे चाहूं, वो मिलता है नहीं मुझकोहर एक सपना मेरा हर बार चकना-चूर होता हैज़माने भर की सारी ऐब मुझको दी मेरे मौला मैं जिसके पास जाता हूँ, वो मुझसे दूर होता है. दिल में हो अगर गम तो छलक जाती है ये आँखें ये दिल...

23.1.11

फोटो गूगल के सौजन्य से. बीजेपी एक बार फिर अपनी घिसी-पिटी सियासत लेकर मैदान में है. वह 26 जनवरी को लाल चौक पर तिरंगा फहराने की जिद पर अड़ी हुई है. इससे पहले 1992 में बीजेपी के एक अग्रिम पंक्ति के नेता मुरली मनोहर जोशी ने इसी तरह के एक कार्यक्रम का आयोजन किया था. तब उनहोंने अपनी 42 दिनों की मैराथन यात्रा के तहत पूरे देश में घूम-घूम कर देशभक्ति का ताबड़तोड़ प्रोपेगेंडा किया...

20.1.11

फोटो गूगल के सौजन्य से. शीर्षक थोड़ा चौकाने वाला हो सकता है। आप सोच रहे होंगे कि एक ऐसे शख्स से हम क्या सीख सकते हैं, जिन्होंने देश में धमाके की बात स्वीकार की हो। जो बम का जवाब बम से देने जैसी सोच की नुमाईंदगी करता हो। और जिन्होंने निर्दोषों की जान लेना ही अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया था। पर मैं असीमानंद के गुनाहों का तजकिरा नहीं करने जा रहा हूँ। आज मैं असीमानंद के एक अन्य पहलू की...

19.1.11

    शाम के करीब सात बजे थे. University से रूम पर आया और FM  आन किया. गाना आ रहा था- "पहली-पहली  बार मोहब्बत की है....." गाने की इस बोल को सुनते ही इस फिल्म के दृश्य आँखों के सामने तैरने लगे. यह गाना "सिर्फ तुम"  फिल्म का है. यह फिल्म पिछली सदी के अंतिम दशक के अवसान के समय रिलीज़ हुई थी. 1999 में आयी संजय कपूर और प्रिय गिल अभिनीत यह फिल्म...

6.1.11

6 दिसंबर 2010 को दिग्विजय सिंह का एक बयान आया था. उनहोंने यह बयान राष्ट्रीय रोजनाम सहारा के समूह सम्पादक अज़ीज़ बर्नी के एक पुस्तक के विमोचन समारोह में कही थी. उन्होंने कहा था कि 26/11 की घटना के महज़ तीन घंटे पूर्व हेमंत करकरे ने मुझ से फ़ोन पर बात की थी. इस बातचीत में श्री करकरे ने मुझसे कहा था कि हिन्दू कट्टरपंथी से मेरी...

3.1.11

माननीय प्रधानमन्त्री महोदय! नव वर्ष और नए दशक की हार्दिक शुभकामनाएं. पत्र थोड़ा विलंब से लिख रहा हूँ. दरअसल ज़रा व्यस्तता का दौर चल रहा था जो अब टल चुका है. यह पत्र मात्र बधाई संदेश नहीं है, बल्कि शीर्षक पढ़ कर आपको कुछ-कुछ अंदाजा हो गया होगा. यह आपके प्रधानमंत्रित्व काल की दूसरी पारी है. कुल मिला कर सातवाँ साल. मैं यहाँ आपके पहले कार्यकाल की बात नहीं कर रहा  और न ही दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष...

2.1.11

पलकों से आसमां पर एक तस्वीर बना डाली. उस तस्वीर के नीचे एक नाम लिख दिया; फीका है इसके सामने चाँद ये पैगाम लिख दिया सितारों के ज़रिये चाँद को जब ये पता चला एक रोज़ अकेले में वो मुझसे उलझ पड़ा कहने लगा कि आखिर ये माजरा क्या है उस नाम और चेहरे के पीछे का किस्सा क्या है. मैं ने कहा- ऐ चाँद क्यूं मुझसे उलझ रहा है तूं टूटा तेरा गुरूर तो मुझ पर बरस रहा है तूं. वो तस्वीर मेरे महबूब की है, ये जान ले तूं तेरी औकात नहीं उसके सामने, यह मान ले तूं. ये सुन के चाँद ने गुसे में ये कहा- अकेला हूँ काइनात...