23.1.11

फोटो गूगल के सौजन्य से. बीजेपी एक बार फिर अपनी घिसी-पिटी सियासत लेकर मैदान में है. वह 26 जनवरी को लाल चौक पर तिरंगा फहराने की जिद पर अड़ी हुई है. इससे पहले 1992 में बीजेपी के एक अग्रिम पंक्ति के नेता मुरली मनोहर जोशी ने इसी तरह के एक कार्यक्रम का आयोजन किया था. तब उनहोंने अपनी 42 दिनों की मैराथन यात्रा के तहत पूरे देश में घूम-घूम कर देशभक्ति का ताबड़तोड़ प्रोपेगेंडा किया...

20.1.11

फोटो गूगल के सौजन्य से. शीर्षक थोड़ा चौकाने वाला हो सकता है। आप सोच रहे होंगे कि एक ऐसे शख्स से हम क्या सीख सकते हैं, जिन्होंने देश में धमाके की बात स्वीकार की हो। जो बम का जवाब बम से देने जैसी सोच की नुमाईंदगी करता हो। और जिन्होंने निर्दोषों की जान लेना ही अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया था। पर मैं असीमानंद के गुनाहों का तजकिरा नहीं करने जा रहा हूँ। आज मैं असीमानंद के एक अन्य पहलू की...

19.1.11

    शाम के करीब सात बजे थे. University से रूम पर आया और FM  आन किया. गाना आ रहा था- "पहली-पहली  बार मोहब्बत की है....." गाने की इस बोल को सुनते ही इस फिल्म के दृश्य आँखों के सामने तैरने लगे. यह गाना "सिर्फ तुम"  फिल्म का है. यह फिल्म पिछली सदी के अंतिम दशक के अवसान के समय रिलीज़ हुई थी. 1999 में आयी संजय कपूर और प्रिय गिल अभिनीत यह फिल्म...

6.1.11

6 दिसंबर 2010 को दिग्विजय सिंह का एक बयान आया था. उनहोंने यह बयान राष्ट्रीय रोजनाम सहारा के समूह सम्पादक अज़ीज़ बर्नी के एक पुस्तक के विमोचन समारोह में कही थी. उन्होंने कहा था कि 26/11 की घटना के महज़ तीन घंटे पूर्व हेमंत करकरे ने मुझ से फ़ोन पर बात की थी. इस बातचीत में श्री करकरे ने मुझसे कहा था कि हिन्दू कट्टरपंथी से मेरी...

3.1.11

माननीय प्रधानमन्त्री महोदय! नव वर्ष और नए दशक की हार्दिक शुभकामनाएं. पत्र थोड़ा विलंब से लिख रहा हूँ. दरअसल ज़रा व्यस्तता का दौर चल रहा था जो अब टल चुका है. यह पत्र मात्र बधाई संदेश नहीं है, बल्कि शीर्षक पढ़ कर आपको कुछ-कुछ अंदाजा हो गया होगा. यह आपके प्रधानमंत्रित्व काल की दूसरी पारी है. कुल मिला कर सातवाँ साल. मैं यहाँ आपके पहले कार्यकाल की बात नहीं कर रहा  और न ही दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष...

2.1.11

पलकों से आसमां पर एक तस्वीर बना डाली. उस तस्वीर के नीचे एक नाम लिख दिया; फीका है इसके सामने चाँद ये पैगाम लिख दिया सितारों के ज़रिये चाँद को जब ये पता चला एक रोज़ अकेले में वो मुझसे उलझ पड़ा कहने लगा कि आखिर ये माजरा क्या है उस नाम और चेहरे के पीछे का किस्सा क्या है. मैं ने कहा- ऐ चाँद क्यूं मुझसे उलझ रहा है तूं टूटा तेरा गुरूर तो मुझ पर बरस रहा है तूं. वो तस्वीर मेरे महबूब की है, ये जान ले तूं तेरी औकात नहीं उसके सामने, यह मान ले तूं. ये सुन के चाँद ने गुसे में ये कहा- अकेला हूँ काइनात...