16.12.10

बहुत व्यस्त हूँ अभी. परीक्षा सर पर है. तय्यारी मैं लगा हूँ. समझ नहीं आ रहा क्या पढूं, क्या न पढूं. यूं समझ लीजिये उहापोह कि स्थिति है. इसी कारण नए पोस्ट भी नहीं लिख पा रहा हूँ. अब परीक्षा के बाद यानी एक जनवरी से नए सिरे से लिखूंगा. फिलहाल तो ब्लॉग लेखन से ख़ामोशी. &nb...

7.12.10

मैं खुद ही मुलाक़ात को चल देता हूँ मायूसी जब चलके दो कदम नहीं आती तेरी हर अदा मेरी एहसास में बसी है याद तेरी बेसबब नहीं आती......... समंदर आज फिर से खौफज़दा  है चेतावनी दी है किसी ने सुनामी की वही होगा जो पहले हो चुका है अंजाम जैसे तेरी-मेरी कहानी की इन बातों से कोई दहशत नहीं आतीयाद तेरी बेसबब नहीं आती.......  बहुत करीब थे अपनी मंजिल के हम ज़रा सा...

5.12.10

शकील "जमशेदपुरी" एक बस्ती थी, जहाँ चूहों का दर्जनों परिवार हसी-खुशी अपनी जिंदगी बसर कर रहा था. दुनिया के भय-आतंक और ईर्ष्या-द्वेष से दूर वो स्वतंत्र हो कर विचरण करते थे। लेकिन उनकी खुशियों को एक दिन किसी की नजर लग गई। चूहे यह देख कर काफी भयभीत हो गए कि एक बिल्ली उसके गांव में घुस आई है। पहले तो चूहों ने सोचा कि शायद ये बिल्ली इस गाँव से होकर गुजर रही है. उधर बिल्ली ने जैसे ही गाँव में कदम रखा, उसे...

4.12.10

 अपने वजूद को दर्द से सजाए रखते हैं  दिल जलाते हैं और शम्मा बुझाए रखते हैं ये मेरे रात भर रोने की गवाही हैपत्तियों पर शबनम का जो पहरा हैइतनी सी बात कब समझेंगे वो  जख्म दिल का तेरे प्यार से गहरा है फिर भी तेरी तस्वीर दिल में समाए रखते हैं दिल जलाते हैं और शम्मा बुझाए रखते हैं रात भर मैंने जो आसमां की निगहबानी कीचांद और तेरे हुस्न की आजमाइश मेंऔर तुम जो जागती रही रात भर खलल...

3.12.10

शकील "जमशेदपुरी" तस्वीर गूगल के सौजन्य से! छत पे तुम जो आ गई तो लोगों पे सितम हुआअमावस की रात में भी चांद का भ्रम हुआ जिंदगी लगी थिरकने दूर रंजो-गम हुआमुझपे तेरे प्यार का जब से यह करम हुआ याद तेरी आ गई और मुझसे यूं लिपट गईगीत लिखने के लिए हाथ में कलम हुआ लोग पूछते है मुझसे राज मेरे गीत काक्या कहूं मैं उनसे कि बेवफा सनम हुआ मिट सकेगी क्या कभी हीर-रांझे की दास्तां"शकील" तेरे प्यार का किस्सा क्यों खत्म...

17.11.10

शकील "जमशेदपुरी" फोटो गूगल के सौजन्य से! फूल में खुशबू है तुझसे, महकता है तेरे खातिर चिंगारी शोलों में भी है, भड़कता है तेरे खातिर बेशर्मी चांद की देखो ये तकता है तुझे अब तो बेशर्मी इस दिल की देखो, धड़कता है तेरे खातिर अंधेरा फिर घना छाया जुल्फ तूने जो लहराई तेरा चेहरा जो देखे तो चांद लेता है अंगड़ाई बहुत सुनते थे चर्चा फूल, कलियां और शबनम कीतुझे देखा तो जाना है कि सब तेरी है परछाई   पल्लू...