
दिल में हो कुछ और मगर चेहरे से कुछ और दिखाने काहुनर हमने भी सीख लिया है फर्जी रिश्ता बनाने का
अनजान था अपनी सूरत से मैं
दर्पण नैन के उसने दिखलाई
एहसास-ए-मोहब्बत से था खाली
प्रेम फूल के उसने खिलाई
इरादे उसकी समझ न पाया जो था मुझको मिटाने का
हुनर हमने भी सीख लिया है फर्जी रिश्ता बनाने का
चारों तरफ था अंधियारा
वो आशा की एक किरण थी
रौशनी ने दस्तक दी थी
वो सूरज की एक किरण थी
रौशनी का खेल असल में खेल...