17.11.10

शकील "जमशेदपुरी" फोटो गूगल के सौजन्य से! फूल में खुशबू है तुझसे, महकता है तेरे खातिर चिंगारी शोलों में भी है, भड़कता है तेरे खातिर बेशर्मी चांद की देखो ये तकता है तुझे अब तो बेशर्मी इस दिल की देखो, धड़कता है तेरे खातिर अंधेरा फिर घना छाया जुल्फ तूने जो लहराई तेरा चेहरा जो देखे तो चांद लेता है अंगड़ाई बहुत सुनते थे चर्चा फूल, कलियां और शबनम कीतुझे देखा तो जाना है कि सब तेरी है परछाई   पल्लू...